Thursday 5 March 2009

रंगों और शब्दों के बीच की आवाजाही का पड़ाव जयपुर


कलम के लिए दुष्यंत द्वारा
यह आलेख दो मार्च को पत्रिका के मध्य प्रदेश संस्करण में प्रकाशित हुआ था

प्रभु जोशी कथाकार बेहतर हैं या अच्छे पेंटर या उम्दा फिल्मकार, ये तय करना बड़ा मुश्किल है पर ये ज़रूर है कि शब्द रंग और दृश्य तीनों से उनका जुड़ाव उन्हें एक सम्पूर्ण कलाकार बनाता है। अट़्ठारहवीं शताब्दी के अंत और उन्नीसवीं शताब्दी के शुरुआती दशक में कला की दुनिया में कुछ ऐसे लोग हुए और एक आन्दोलन खड़ा हुआ कि रंग और शब्द दोनों विधाओं में साथ काम किया, प्रभु भी वहीं खड़े नजऱ आते हैं अरौर वो बेशक वहाँ कद्दावर भी है और अलग भी...महज उपस्थित भर नहीं हैं।इन दिनों जयपुर के जवाहर कला केंद्र में इन्दौर के इस वर्सेटाईल आर्टिस्ट के लैण्ड स्केप अपना जादू बिखेर रहे हैं। वो अमूर्त और यथार्थ के बीेच एक संवाद सेतु बनाते हैं और ये उनके काम में लगातार दिखता है। जब हमने पूछा कि आप तो मूलत: कथाकार है तो बोले भाई शुरुआत तो चित्रों से हुई फिर शब्दों की दुनिया में रहा हूँ..और ये तो आवाजाही है जो चलती रहती है।प्रभु जोशी भारत के उन् विरले कलाकारों में हैं जिनका काम जब जिस विधा में आया सराहा गया है। यहाँ प्रदर्शित उनके चित्र लैण्ड स्केप के जरिये प्रकृति के रूपांतरण की कलात्मक यात्रा है जिस से गुजरना उनकी अंतर्दृष्टि से होते हुए अपने समय और समाज को देखना भी है। प्रभु कहते हैं कि पेंटिंग मेरे लिए तितलियों को पकडऩे जैसा है कभी एक बच्चे की गलती से मर जाती है , जोशी के लैण्ड स्केप पर उत्तराखंड मालवा और राजस्थान पर्यटन स्थलों छाप नज़र आती है.वे लैण्ड स्केप की प्लेसेज अन्पीपुल्ड के रूप में परिभाषित करते हैं, ऐसे स्थान जहां न तो मनुष्य गया है और ना ही कभी जा पायेगा, उनके लैण्ड स्केप गुजरात में आये भूकंप और भोपाल की झील के नजारे भी नज़र आते हैं, उन्होंने दो पेंटिंग्स भगवान् गणेश पर भी बनायी है ,उनके अनुसार जल रंगों में माफी नामे के लिए कोई स्थान नहीं है, ये तो अपमान सरीखा है। ये एक कलात्मक विरोधाभास है जिससे एक कलाकार को गुजरना ही पड़ता है जबकि तैलीय रंगों को वे शतरंज खेलने जैसा मानते हैं, आप एक कदम चलते हैं और घंटो या कई बार दिनों के लिए वहाँ थम से जाते हैं ।प्रभु का काम इसलिए भी अलग खडा नजऱ आता है कि वे लगातार अपने समय से आँख मिलाते हुए आगे बढ़ते हैं चाहे वो उस वक्त चित्र बना रहे हों कहानी लिख रहे हों या कि कोई फिल्म... कला में बाज़ार की उपस्थति को भी वे अलग नज़रिए से देखते हैं। उनका मानना है कि आवारा पूँजी ने कला में नकारात्मक प्रभाव पैदा किये हैं। यही वजह है कि आज जब दो कलाकार मिलते हैं तो क्राफ्ट या कंटेंट की बजाय इस चर्चा में ज्यादा मसरूफ रहते हैं कि फलां की पेंटिंग दस लाख में बिकी और फलां की बीस लाख या दस हज़ार में जबकि कला मूलत बिकने के लिए होती ही नहीं हैं , वो इस बात पर भी अपनी चिंता जताते हैं कि अमूर्तन की आंधी में रियलिस्टिक कहीं हाशिये पर आ गयी है। इन दिनों वे अपने तीन उपन्यासों जो उन्होंने बीस साल के लम्बे वक्फे में लिखे हैं, को अंतिम रूप दे रहे हैं..तो लगता है कि रंगों की दुनिया में उतरकर ये कथाकार खोया नहीं था बस एक अल्प विराम लिया था..ये भी एक बार फिर स्पष्ट होता है कि जब ऐसा लगता है सृजन की दुनिया के लोग कुछ नहीं कर रहे हैं तो मानना चाहिये कि वे चुपचाप किसी बड़े या अलग से काम को अंजाम दे रहे होते हैं अपने प्रशंसकों पाठकों या दर्शकों को चौंकाने के लिए।

9 comments:

cmpershad said...

प्रभू जोशी जी के लेखन से हम कुछ वाकिफ थे पर उनके अद्भुत चित्र देख कर उनकी प्रतिभा को नमन!!

विष्णु बैरागी said...

प्रभु को देखना, प्रभु को पढना, प्रभु के बारे में पढना सदैव ही सुखद होता है।

एक अनुरोध। यदि आपके लिए सम्‍भव हो और आप उचित समझें तो अपने ब्‍लाग से वर्ड वेरीफिकेशन का प्रावधान अविलम्‍ब हटा लें।

pallav said...

Prabhuji par sunder tippni ke liye aabhar.

abhishek said...

prabhu ji un kalakaron men se ek hain jo bazaar ki chapet men nahi aate ...balki bazaar ko bhi lapet lete hain.

Uday Prakash said...

Prabhu is one creative soul and body, I've loved and admired since his early narratives. Anything written about him is always shorter to what it should have been.
Besides colors and fiction, one aspect about this upright personality is this : 'he is a prolific, vigorous reader.'

minakshi baghel said...

shandar likha hai dushyant ji apne! adbhut shabdchitr hai.ap bhasha ke jadugar hain sach men

nikhil tiwari said...

dushyant ji tak badhai pahuche.vilakshan gadykaar hain we.

Nirmla Kapila said...

prabhuji par sunder abhivyakti ke liye badhaai

suman said...

Joshi ji ke bare mai bahut si bate aap se malum huee shukriya